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अनुच्छेद 135 Part V

विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 135 (विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना): भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की अधिकारिता, न्यायिक स्वतंत्रता और अपीलीय शक्तियों का प्रावधान।
संविधान के भाग V के अध्याय IV (संघ की न्यायपालिका) का अनुच्छेद 135 'विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना' से संबंधित है। यह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की सेवा शर्तों, अभिलेख न्यायालय (Court of Record) की शक्ति, केंद्र-राज्य विवादों की आरंभिक अधिकारिता, दीवानी व फौजदारी अपीलों, निर्णयों के पुनर्विलोकन (Review) तथा न्यायिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 135): Part V के अंतर्गत 'विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
सर्वोच्च न्यायालय अपनी शक्तियों का प्रयोग संवैधानिक नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के तहत पूर्णतः स्वतंत्र रूप से करता है।
यह सुप्रीम कोर्ट को संविधान का सर्वोच्च संरक्षक और हर नागरिक के लिए न्याय की अंतिम उम्मीद बनाता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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