आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 148 Part V

भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 148 (भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)): भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा सरकारी खातों और जनता के धन के स्वतंत्र ऑडिट का प्रावधान।
संविधान के भाग V के अध्याय V का अनुच्छेद 148 'भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)' का उपबंध करता है। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया था। यह केंद्र और राज्य सरकारों के प्रत्येक रुपये के खर्च की स्वतंत्र जांच और उसकी ऑडिट रिपोर्ट संसद व विधानसभा के पटल पर रखने की अनिवार्यता तय करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 148): Part V के अंतर्गत 'भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 6 खंड (Clauses) तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
अनुच्छेद 148(4) के तहत CAG सेवानिवृत्ति के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई और पद ग्रहण नहीं कर सकते ताकि उनकी निष्पक्षता बनी रहे।
यह जनता के टैक्स के पैसे की चौकीदारी करता है और सरकारी खर्च में किसी भी घोटाले या अनियमितता को संसद व जनता के सामने उजागर करता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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