आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 334 Part XVI

स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का निश्चित अवधि के पश्चात् न रहना

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 334 (स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का निश्चित अवधि के पश्चात् न रहना): भाग XVI के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय आयोगों का प्रावधान।
संविधान के भाग XVI का अनुच्छेद 334 'स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का निश्चित अवधि के पश्चात् न रहना' का उपबंध करता है। यह लोकसभा (330) और राज्य विधानसभाओं (332) में अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण, सेवाओं में दावों (335), तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है। Note: 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन नामांकन को आगे नहीं बढ़ाया गया।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 334): Part XVI के अंतर्गत 'स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का निश्चित अवधि के पश्चात् न रहना' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 1 खंड (Clauses) व 4 उप-खंड तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
अनुच्छेद 334 के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
अनुच्छेद 341 और 342 के तहत अनुसूचित जाति या जनजाति की सूची में कोई भी बदलाव केवल संसद द्वारा पारित कानून से ही किया जा सकता है।
यह वंचित वर्गों को संसद व विधानसभाओं में आवाज देता है और अत्याचार या भेदभाव की शिकायतों की जांच के लिए राष्ट्रीय आयोगों को सिविल कोर्ट की शक्तियां देता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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