आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 352 Part XVIII

आपात की उद्घोषणा (राष्ट्रीय आपातकाल)

त्वरित सारांश (TL;DR)
युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के समय राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने की शक्ति देता है, जो कैबिनेट की लिखित सलाह और संसद की मंजूरी के अधीन है।
अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल का प्रावधान करता है। 1975 के आपातकाल के अनुभवों के बाद 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा इसे अत्यंत कड़ा बनाया गया: अब आपातकाल केवल पूरे मंत्रिमंडल की लिखित सलाह पर ही लग सकता है, एक महीने में संसद के दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी अनिवार्य है, और अदालत में इसकी दुर्भावनापूर्ण घोषणा को चुनौती दी जा सकती है।
अटल जीवन का अधिकार: राष्ट्रीय आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 को कभी निलंबित नहीं किया जा सकता
लिखित कैबिनेट सहमति की अनिवार्यता से तानाशाही पर रोक
अवैध आपातकाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का अधिकार
30 दिनों के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित होना अनिवार्य है, अन्यथा यह स्वतः समाप्त हो जाता है।
यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रीय संकट के बहाने कोई सरकार देश में लोकतंत्र और नागरिकों के बुनियादी जीने के अधिकार को कुचल न सके।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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