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अनुच्छेद 361A Part XIX

संसद और राज्यों के विधान-मंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 361A (संसद और राज्यों के विधान-मंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण): भाग XIX के तहत संवैधानिक उन्मुक्तियों, संसदीय कार्यवाही के प्रकाशन की स्वतंत्रता और संवैधानिक परिभाषाओं का प्रावधान।
संविधान के भाग XIX (प्रकीर्ण) का अनुच्छेद 361A 'संसद और राज्यों के विधान-मंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण' का प्रावधान करता है। इसमें पद के दौरान राष्ट्रपति व राज्यपालों की कार्यात्मक उन्मुक्ति (परंतु सरकार पर सीधे मुकदमा करने का नागरिक अधिकार खुला रखते हुए - 361), संसद व विधानसभा की सच्ची कार्यवाही को अखबार/टीवी में प्रकाशित करने की प्रेस स्वतंत्रता (361A), राजाओं के प्रिवी पर्स की समाप्ति (363A) और संविधान की मुख्य परिभाषाएं (366-367) शामिल हैं।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 361A): Part XIX के अंतर्गत 'संसद और राज्यों के विधान-मंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 3 खंड (Clauses) तथा स्पष्ट संवैधानिक शर्तें (Provisos) दी गई हैं
मनमाने प्रशासनिक आदेशों के बजाय संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही को अनिवार्य बनाता है
अनुच्छेद 361 के दूसरे परंतुक में स्पष्ट लिखा है कि किसी भी नागरिक को भारत सरकार या राज्य सरकार के विरुद्ध अदालत में मुकदमा चलाने से नहीं रोका जा सकता।
इसने राजशाही के विशेषाधिकारों (प्रिवी पर्स) को समाप्त कर लोकतांत्रिक समानता स्थापित की और संसदीय पत्रकारिता को सुरक्षा दी।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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