आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 88 Part V

सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 88 (सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार): भाग V के तहत भारतीय संसद (लोकसभा व राज्यसभा) की संरचना, कार्यप्रणाली व कानून निर्माण के नियम।
संविधान के भाग V के अध्याय II (संसद) में अनुच्छेद 88 'सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार' का प्रावधान करता है। यह लोकसभा व राज्यसभा के गठन, अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों, सांसदों की अर्हता व निरर्हता, कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों को पास करने, बजट अनुदान और संसदीय विशेषाधिकारों की संवैधानिक प्रक्रिया तय करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 88): Part V के अंतर्गत 'सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
मनमाने प्रशासनिक आदेशों के बजाय संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही को अनिवार्य बनाता है
संसद की सभी विधायी कार्रवाइयां और नियम संविधान के प्रावधानों, मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 13) और मूल ढांचे के अधीन हैं।
यह सुनिश्चित करता है कि देश का हर कानून और बजट खर्च जनता के चुने हुए सांसदों द्वारा तय संवैधानिक नियमों के तहत ही पास हो।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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