आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

अनुच्छेद 9 Part II

विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना

त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 9 (विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना): Part II के अंतर्गत भारतीय नागरिकता की पात्रता और संवैधानिक नियमों का निर्धारण।
संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 9 'विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 9): Part II के अंतर्गत 'विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
यह एक सीधा और स्पष्ट संवैधानिक निर्देश है जिसका पालन करना सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए अनिवार्य है
अनुच्छेद 9 के उल्लंघन में की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
भारत में एकहरी नागरिकता लागू है; अनुच्छेद 9 के अनुसार किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से लेने पर भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है और अनुच्छेद 11 के तहत संसद इस पर कानून बनाती है।
अनुच्छेद 9 भारत के प्रत्येक नागरिक की कानूनी पहचान और समान संवैधानिक अधिकारों की बुनियाद है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें:
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