क्या आप सार्वजनिक स्थान पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी या सरकारी अधिकारी का वीडियो बना सकते हैं?
हाँ! सार्वजनिक स्थान पर ड्यूटी कर रहे अधिकारी का वीडियो बनाना आपका संवैधानिक अधिकार है, बशर्ते आप उनके काम में बाधा न डालें।
- • हाई कोर्ट के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर ड्यूटी कर रहे अधिकारी की कोई निजी प्राइवेसी नहीं होती।
- • पुलिस केवल वीडियो बनाने के नाम पर फोन नहीं छीन सकती और न ही वीडियो डिलीट करवा सकती है।
- सुरक्षित दूरी पर रहकर वीडियो बनाएं ताकि कोई काम में बाधा का आरोप न लगा सके।
- फोन छीनने की कोशिश पर वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करें।
क्या नागरिकों के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और तख्तियां लेकर विरोध जताने का अधिकार है?
हाँ! बिना हथियारों के शांतिपूर्वक एकत्र होना और विरोध जताना अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत मौलिक अधिकार है।
- • लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार है।
- • बिना ठोस हिंसा की आशंका के धारा 144 लगाना असंवैधानिक है।
- शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराएं और मनमाने प्रतिबंधों को हाई कोर्ट में चुनौती दें।
यदि कोई नागरिक कोर्ट में वकील की फीस देने में असमर्थ हो तो क्या होगा?
अनुच्छेद 39A के तहत सरकार अदालत में मुफ्त वकील (विधिक सहायता) उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है।
- • गरीबी या पैसे की कमी के कारण कोई न्याय से वंचित नहीं रह सकता। नालसा हर अदालत में मुफ्त वकील देती है।
- • महिलाएं, बच्चे, SC/ST और हिरासत में बंद लोग इसके सीधे हकदार हैं।
- राष्ट्रीय लीगल हेल्पलाइन 15100 पर कॉल करें या जज साहब से सीधे लीगल एड वकील की मांग करें।
क्या उपेक्षा या प्रताड़ना होने पर बुजुर्ग माता-पिता बच्चों को दी गई संपत्ति की रजिस्ट्री रद्द करा सकते हैं?
हाँ! वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 23 के तहत यदि बच्चे माता-पिता की देखभाल नहीं करते, तो ट्रांसफर ट्रिब्यूनल संपत्ति की रजिस्ट्री तुरंत रद्द कर सकता है।
- • बुजुर्ग सीधे एसडीएम (SDM) की मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में अर्जी लगा सकते हैं।
- • ट्रिब्यूनल 90 दिनों में संपत्ति वापस दिलाने और बच्चों को बेदखल करने का आदेश दे सकती है।
- स्थानीय एसडीएम कार्यालय में मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के पास आवेदन जमा करें।
आरटीआई (RTI) में किस स्थिति में सरकारी विभाग को 48 घंटे के भीतर जवाब देना अनिवार्य है?
48 घंटे के भीतर। यदि मांगी गई जानकारी किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता (Life or Liberty) से जुड़ी हो, तो 48 घंटे में सूचना देना अनिवार्य है।
- • सामान्य मामलों में 30 दिन का समय होता है, लेकिन जीवन व स्वतंत्रता के मामलों में केवल 48 घंटे की समय सीमा है।
- आवेदन पर बड़े अक्षरों में लिखें: 'धारा 7(1) के तहत जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित अति-आवश्यक आवेदन'।
क्या रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर या डीजे बजाना वैध है?
सख्ती से मना है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार रात में शांति से सोना अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाना पूर्ण प्रतिबंधित है।
- • केवल सरकार द्वारा अधिसूचित 15 त्योहारों पर ही रात 12 बजे तक की छूट मिल सकती है।
- रात 10 बजे के बाद तेज आवाज होने पर तुरंत 112 पर फोन करें।
यदि कोई सार्वजनिक रूप से जातिसूचक गाली दे या अपमान करे तो क्या कानूनी कार्रवाई होती है?
सख्त गैर-जमानती अपराध। किसी एससी/एसटी नागरिक को सार्वजनिक रूप से जातिसूचक गाली देने पर बिना किसी प्रारंभिक जांच के सीधी गैर-जमानती एफआईआर होती है।
- • 2018 के संशोधन के बाद बिना किसी जांच के तुरंत एफआईआर और कार्रवाई का नियम है।
- थाने में लिखित शिकायत दें जिसमें बोले गए शब्दों और गवाहों का उल्लेख हो।
भारत में सिंगल पेरेंट द्वारा बच्चा गोद लेना: क्या अविवाहित महिला या पुरुष कानूनी रूप से बच्चा गोद ले सकते हैं?
हाँ! किशोर न्याय अधिनियम 2015 और कारा (CARA) नियमों के तहत, एक अकेली अविवाहित महिला किसी भी लिंग (बेटा या बेटी) का बच्चा गोद ले सकती है, जबकि अकेला पुरुष केवल बेटा गोद ले सकता है। अविवाहित होना कोई कानूनी बाधा नहीं है।
- • 1. अकेली महिला किसी भी लिंग (लड़का या लड़की) का बच्चा कानूनी रूप से गोद ले सकती है।
- • 2. अकेला पुरुष केवल लड़के को ही गोद ले सकता है, लड़की को गोद लेने की अनुमति कानूनन नहीं है।
- • 3. गोद लेने वाले अभिभावक की न्यूनतम आयु 25 वर्ष और स्थिर आय होना अनिवार्य है।
- 1. केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की वेबसाइट (cara.wcd.gov.in) पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें।
- 2. पहचान पत्र, आय प्रमाण, मेडिकल फिटनेस और होम स्टडी रिपोर्ट (HSR) अपलोड करें।
- 3. मान्यता प्राप्त एजेंसी 3 महीने के भीतर घर का भौतिक निरीक्षण करती है।
- 4. जिला मजिस्ट्रेट अंतिम कानूनी एडॉप्शन आदेश जारी करते हैं जो पूर्ण मातृत्व/पितृत्व अधिकार देता है।