क्या पुलिस यह कहकर FIR से मना कर सकती है कि "यह हमारे क्षेत्र का नहीं है"?
बिल्कुल नहीं! अपराध कहीं भी हुआ हो, पुलिस को "जीरो FIR" दर्ज करनी ही होगी।
- • जीरो एफआईआर देश के किसी भी पुलिस थाने में दर्ज करवाई जा सकती है।
- • थाना उस पर नंबर "0" डालकर दर्ज करेगा और बाद में संबंधित थाने को भेजेगा।
- • संज्ञेय अपराध की सूचना पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
- • मना करने वाले पुलिसकर्मी पर IPC 166A / BNS 199 के तहत 2 साल तक की जेल हो सकती है।
- ड्यूटी ऑफिसर से कहें: "मुझे जीरो एफआईआर दर्ज करानी है, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार आप मना नहीं कर सकते।"
- यदि थाना मना करे तो जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत भेजें।
- अदालत में धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र देकर मजिस्ट्रेट से आदेश करा सकते हैं।
यदि पुलिस आपको गिरफ्तार करने आए तो आपके पास क्या कानूनी अधिकार हैं?
गिरफ्तारी का कारण जानने, वकील करने, परिजन को सूचना देने और 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार।
- • डी.के. बसु दिशानिर्देश के अनुसार पुलिस को अरेस्ट मेमो बनाना होगा।
- • 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है।
- • धारा 54 के तहत मेडिकल जांच कराने की मांग कर सकते हैं।
- स्पष्ट पूछें कि किस धारा में गिरफ्तारी हो रही है और अरेस्ट मेमो मांगें।
- अपने परिजन या वकील को फोन करने की मांग करें।
क्या पुलिस मारपीट कर आपसे जबरन कुबूलनामा या सादे कागज पर दस्तखत करा सकती है?
नहीं! पुलिस के सामने दिया गया इकबालिया बयान अदालत में अमान्य है, और आपको चुप रहने का मौलिक अधिकार है।
- • अनुच्छेद 20(3) के अनुसार किसी भी अभियुक्त को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
- • पुलिस के सामने थर्ड डिग्री या मारपीट कर लिया गया बयान कोर्ट में सबूत नहीं माना जाता।
- शांत रहें और कहें कि बयान वकील की मौजूदगी में या मजिस्ट्रेट के सामने ही देंगे।
- कोरे कागज पर दस्तखत न करें और मारपीट की सूचना मजिस्ट्रेट को सीधे दें।
क्या पुलिस सामान्य गिरफ्तारी के दौरान आपको सरेआम हथकड़ी लगा सकती है?
नहीं! सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुसार सामान्य आरोपियों को हथकड़ी लगाना असंवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
- • सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार हथकड़ी लगाना केवल अत्यंत हिंसक या भागने की आशंका वाले मामलों में ही कोर्ट की अनुमति से संभव है।
- • आम नागरिक को हथकड़ी लगाकर घुमाना गैरकानूनी है।
- प्रेम शंकर शुक्ला केस का हवाला देकर हथकड़ी लगाने पर आपत्ति दर्ज कराएं।
क्या पुलिस बिना लिखित नोटिस के आपको थाने बुला सकती है?
नहीं। 7 साल से कम सजा वाले मामलों में पुलिस को धारा 41A (BNSS 35) के तहत औपचारिक लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
- • सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार फैसले के अनुसार फोन पर थाने बुलाना गैरकानूनी है।
- • लिखित नोटिस का पालन करने पर पुलिस बिना कोर्ट आदेश के गिरफ्तार नहीं कर सकती।
- कहें: 'सर, कृपया धारा 41A के तहत लिखित नोटिस भेजें, मैं अपने वकील के साथ उपस्थित हो जाऊंगा।'
क्या एफआईआर दर्ज कराने पर तुरंत मुफ्त कॉपी पाना आपका कानूनी अधिकार है?
हाँ। धारा 154(2) के तहत शिकायतकर्ता को एफआईआर की मुहर लगी प्रति तुरंत और बिल्कुल मुफ्त देना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।
- • पुलिस एफआईआर की कॉपी के लिए पैसे नहीं मांग सकती।
- • सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एफआईआर 24-48 घंटे में ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध होनी चाहिए।
- कहें: 'सर, धारा 154(2) के तहत कृपया मुझे एफआईआर की प्रमाणित मुफ्त कॉपी दीजिए।'
क्या पुलिस 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, महिलाओं या 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों को थाने बुला सकती है?
सख्ती से मना है। धारा 160 के तहत महिलाओं, 15 साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से बड़े बुजुर्गों से केवल उनके घर जाकर ही पूछताछ की जा सकती है।
- • पुलिस अधिकारी को परिजनों की मौजूदगी में उनके घर आकर बयान लेना होगा।
- • थाने बुलाना कानून का सीधा उल्लंघन है।
- कहें: 'धारा 160 के अनुसार आप मुझे थाने नहीं बुला सकते। आप घर आकर बयान दर्ज कर सकते हैं।'
क्या पुलिस के सामने कबूल किया गया अपराध कोर्ट में सबूत माना जाता है?
बिल्कुल नहीं। पुलिस के सामने दिए गए किसी भी कबूलनामे या साइन किए गए कागज की कोर्ट में कोई कानूनी मान्यता नहीं होती।
- • केवल मजिस्ट्रेट के सामने अपनी मर्जी से दिया गया बयान (धारा 164) ही कोर्ट में मान्य होता है।
- • थाने में मारपीट कर साइन कराए गए कागजात कोर्ट में अमान्य होते हैं।
- मजिस्ट्रेट के सामने पेश होते ही तुरंत बताएं कि पुलिस ने डरा-धमकाकर जबरन साइन करवाए हैं।