झूठी एफआईआर में गिरफ्तारी का डर: अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) आपको गिरफ्तारी से पहले कैसे बचाती है?
बीएनएसएस की धारा 482 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को झूठे गैर-जमानती मामले में गिरफ्तारी की आशंका हो, तो वह सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत ले सकता है। जमानत मिलने पर पुलिस जेल नहीं भेज सकती।
- • 1. गिरफ्तारी की ठोस आशंका होने पर एफआईआर दर्ज होने से पहले भी अग्रिम जमानत की अर्जी दी जा सकती है।
- • 2. अग्रिम जमानत मिलने के बाद पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर मुचलका लेकर मौके पर ही छोड़ना अनिवार्य है।
- • 3. अदालत जांच में सहयोग करने और देश न छोड़ने जैसी सामान्य शर्तें लगा सकती है।
- 1. अपनी बेगुनाही के सबूत (टिकट, सीसीटीवी फुटेज या चैट) तुरंत इकट्ठा करें।
- 2. अधिवक्ता के माध्यम से सत्र न्यायालय में बीएनएसएस धारा 482 के तहत अग्रिम जमानत याचिका लगाएं।
- 3. कोर्ट से अंतरिम राहत (गिरफ्तारी पर रोक) का अनुरोध करें।
- 4. आदेश मिलने पर जमानतदार पेश करें और कोर्ट ऑर्डर की प्रमाणित प्रति हमेशा अपने पास रखें।
पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन में देरी या रिश्वत की मांग: 21 दिन की समयसीमा और शिकायत के नियम?
विदेश मंत्रालय के नियमों के अनुसार, पासपोर्ट का पुलिस वेरिफिकेशन 21 दिनों में पूरा होना अनिवार्य है। पुलिस वेरिफिकेशन पूरी तरह मुफ्त है, रिश्वत मांगना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।
- • 1. सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी केस में स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट बनवाना और विदेश जाना अनुच्छेद 21 का मौलिक अधिकार है।
- • 2. पुलिस का काम केवल नागरिकता और आपराधिक रिकॉर्ड की पुष्टि करना है, चरित्र पर राय देना नहीं।
- • 3. एमपासपोर्ट ऐप के माध्यम से 21 दिनों में ऑनलाइन रिपोर्ट सबमिट करना अनिवार्य है।
- 1. पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर अपने पुलिस वेरिफिकेशन की स्थिति ट्रैक करें।
- 2. आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और पासपोर्ट पावती पर्ची लेकर थाने जाएं।
- 3. कोई नकद पैसा न दें; रिश्वत मांगे जाने पर एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) हेल्पलाइन 1064 पर कॉल करें।
- 4. सीपीग्राम्स (pgportal.gov.in) पर क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को टैग कर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
फोन चोरी या मारपीट में पुलिस ने सिर्फ एनसीआर (NCR) थमा दी: एफआईआर न करने पर क्या करें?
ललिता कुमारी निर्णय और बीएनएसएस धारा 173 के तहत, संज्ञेय अपराध (चोरी, मारपीट, धोखाधड़ी) में पुलिस को बाकायदा एफआईआर दर्ज करनी होगी। आंकड़े छुपाने के लिए केवल एनसीआर पर्ची थमाना गैरकानूनी है।
- • 1. संज्ञेय अपराधों (जैसे मोबाइल स्नैचिंग, चोरी, हमला) में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है, केवल एनसीआर नहीं।
- • 2. एनसीआर का अर्थ है कि पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के जांच या गिरफ्तारी नहीं करेगी, जिससे केस ठंडा पड़ जाता है।
- • 3. एफआईआर दर्ज करने से मना करने वाले पुलिसकर्मी को धारा 199 BNS के तहत 2 साल तक की जेल हो सकती है।
- 1. फोन छीने जाने या चोरी होने पर एनसीआर लेने से मना करें; धारा 303 BNS के तहत एफआईआर की मांग करें।
- 2. थाना प्रभारी मना करे, तो बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत पुलिस अधीक्षक (SP) को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजें।
- 3. कार्रवाई न होने पर वकील के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 175(3) की अर्जी लगाएं।
- 4. मजिस्ट्रेट पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच करने का कानूनी आदेश देंगे।