यदि पुलिस आपको गिरफ्तार करने आए तो आपके पास क्या कानूनी अधिकार हैं?
गिरफ्तारी का कारण जानने, वकील करने, परिजन को सूचना देने और 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार।
- • डी.के. बसु दिशानिर्देश के अनुसार पुलिस को अरेस्ट मेमो बनाना होगा।
- • 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है।
- • धारा 54 के तहत मेडिकल जांच कराने की मांग कर सकते हैं।
- स्पष्ट पूछें कि किस धारा में गिरफ्तारी हो रही है और अरेस्ट मेमो मांगें।
- अपने परिजन या वकील को फोन करने की मांग करें।
क्या पुलिस मारपीट कर आपसे जबरन कुबूलनामा या सादे कागज पर दस्तखत करा सकती है?
नहीं! पुलिस के सामने दिया गया इकबालिया बयान अदालत में अमान्य है, और आपको चुप रहने का मौलिक अधिकार है।
- • अनुच्छेद 20(3) के अनुसार किसी भी अभियुक्त को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
- • पुलिस के सामने थर्ड डिग्री या मारपीट कर लिया गया बयान कोर्ट में सबूत नहीं माना जाता।
- शांत रहें और कहें कि बयान वकील की मौजूदगी में या मजिस्ट्रेट के सामने ही देंगे।
- कोरे कागज पर दस्तखत न करें और मारपीट की सूचना मजिस्ट्रेट को सीधे दें।
क्या पुलिस बिना लिखित नोटिस के आपको थाने बुला सकती है?
नहीं। 7 साल से कम सजा वाले मामलों में पुलिस को धारा 41A (BNSS 35) के तहत औपचारिक लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
- • सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार फैसले के अनुसार फोन पर थाने बुलाना गैरकानूनी है।
- • लिखित नोटिस का पालन करने पर पुलिस बिना कोर्ट आदेश के गिरफ्तार नहीं कर सकती।
- कहें: 'सर, कृपया धारा 41A के तहत लिखित नोटिस भेजें, मैं अपने वकील के साथ उपस्थित हो जाऊंगा।'
क्या एफआईआर दर्ज कराने पर तुरंत मुफ्त कॉपी पाना आपका कानूनी अधिकार है?
हाँ। धारा 154(2) के तहत शिकायतकर्ता को एफआईआर की मुहर लगी प्रति तुरंत और बिल्कुल मुफ्त देना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।
- • पुलिस एफआईआर की कॉपी के लिए पैसे नहीं मांग सकती।
- • सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एफआईआर 24-48 घंटे में ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध होनी चाहिए।
- कहें: 'सर, धारा 154(2) के तहत कृपया मुझे एफआईआर की प्रमाणित मुफ्त कॉपी दीजिए।'
यदि थाना प्रभारी गंभीर अपराध पर भी एफआईआर दर्ज करने से मना कर दे तो क्या करें?
संगीन अपराध है। एफआईआर न लिखने वाले पुलिस अधिकारी को धारा 166A (BNS 199) के तहत 2 साल तक की जेल हो सकती है।
- • ललिता कुमारी केस में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया है।
- • थाना न सुने तो एसपी (SP) को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजें या कोर्ट में धारा 156(3) में अर्जी लगाएं।
- अपनी लिखित शिकायत की रिसीविंग लें और न मिलने पर एसपी को रजिस्टर्ड डाक से भेजें।
क्या गिरफ्तारी के समय अरेस्ट मेमो पर किसी परिजन या स्थानीय गवाह के हस्ताक्षर जरूरी हैं?
अनिवार्य है। धारा 41B के तहत अरेस्ट मेमो पर परिवार के कम से कम एक सदस्य या इलाके के प्रतिष्ठित व्यक्ति के हस्ताक्षर होना कानूनी रूप से जरूरी है।
- • अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी का सही समय, तारीख व स्थान लिखा होना चाहिए।
- कहें: 'सर, धारा 41B के तहत कृपया अरेस्ट मेमो बनाइए और गवाह के हस्ताक्षर करवाइए।'
क्या पुलिस हिरासत के दौरान हर 48 घंटे में डॉक्टर से मेडिकल जांच कराना अनिवार्य है?
हाँ, अनिवार्य है। धारा 54 के तहत गिरफ्तारी के समय और हिरासत के दौरान हर 48 घंटे में सरकारी डॉक्टर से मेडिकल जांच कराना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।
- • मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित होता है कि पुलिस ने हिरासत में मारपीट की है या नहीं।
- डॉक्टर को सभी चोटें दिखाएं और एमएलसी (MLC) में दर्ज करवाएं।
पुलिस द्वारा घर की तलाशी: क्या पुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं के निजी कमरों में बिना महिला पुलिस के घुस सकते हैं?
नहीं! बीएनएसएस की धारा 103 के तहत, महिलाओं के निवास वाले कमरे की तलाशी के समय उन्हें हटने का अवसर देना होगा और तलाशी केवल महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में शालीनता के साथ ही ली जा सकती है।
- • 1. पुरुष पुलिसकर्मी बिना महिला पुलिस के महिलाओं के शयनकक्ष या निजी स्थान में जबरन नहीं घुस सकते।
- • 2. अंदर जाने से पहले महिलाओं को पर्दा करने और कमरे से हटने का उचित समय देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- • 3. किसी भी महिला की शारीरिक तलाशी केवल और केवल महिला पुलिसकर्मी द्वारा ही ली जा सकती है।
- 1. बंद दरवाजे से पूछें: "अपना सर्च वारंट दिखाएं और बताएं कि क्या आपके साथ महिला पुलिसकर्मी हैं?\"
- 2. स्पष्ट कहें: "बीएनएसएस की धारा 103 के अनुसार महिला पुलिस के बिना आप महिलाओं के कमरे में नहीं आ सकते।\"
- 3. पड़ोस के दो सम्मानित नागरिकों को गवाह (पंच) के रूप में तुरंत बुलाएं।
- 4. जबरदस्ती घुसने पर 112 पर कॉल करें और मर्यादा हनन की आपराधिक शिकायत दर्ज कराएं।