कम स्पीड वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर (<25 किमी/घंटा): क्या ड्राइविंग लाइसेंस, नंबर प्लेट या आरटीओ रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
नहीं! केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार, 25 किमी/घंटा से कम गति और 250 वाट से कम मोटर वाले ई-स्कूटर को साइकिल की श्रेणी में रखा गया है। इसके लिए ड्राइविंग लाइसेंस, आरटीओ पंजीकरण और रोड टैक्स की आवश्यकता नहीं है।
- • 1. 250 वॉट से कम क्षमता और 25 किमी/घंटे से कम रफ्तार वाले दोपहिया वाहन मोटर वाहन अधिनियम के दायरे से बाहर हैं।
- • 2. ट्रैफिक पुलिस ऐसे ई-स्कूटर चालकों से ड्राइविंग लाइसेंस या आरसी की मांग नहीं कर सकती।
- • 3. सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनना अच्छा है, लेकिन मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान नहीं काटा जा सकता।
- 1. गाड़ी की डिक्की में निर्माता कंपनी का ARAI/ICAT छूट प्रमाण पत्र हमेशा रखें।
- 2. रोके जाने पर शालीनता से कहें: "सर, यह 25 किमी/घंटा से कम रफ्तार वाला ई-स्कूटर है (CMVR नियम 2(u)), इसके लिए लाइसेंस या आरसी अनिवार्य नहीं है।\"
- 3. निर्माता का प्रमाण पत्र दिखाएं।
- 4. जब्ती की धमकी मिलने पर ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी से बात कराने का अनुरोध करें।
दूसरे राज्य में शिफ्ट हुए: बिना नया नंबर लिए अपनी कार या बाइक कितने महीने तक कानूनी रूप से चला सकते हैं?
12 महीने तक! मोटर वाहन अधिनियम की धारा 47 के तहत, आप किसी भी अन्य राज्य में अपनी कार या बाइक बिना नंबर बदले 12 महीने (1 वर्ष) तक कानूनी रूप से चला सकते हैं।
- • 1. धारा 47 स्पष्ट रूप से दूसरे राज्य के वाहन को 12 महीने तक चलाने की वैधानिक छूट देती है।
- • 2. ट्रैफिक पुलिस 12 महीने की अवधि के भीतर केवल दूसरे राज्य का नंबर होने के आधार पर चालान नहीं काट सकती।
- • 3. स्थानीय आरटीओ में नया नंबर और टैक्स केवल 1 वर्ष से अधिक लगातार रहने पर ही लागू होता है।
- 1. राज्य में प्रवेश की तारीख का प्रमाण (फास्टैग टोल रसीद, पेट्रोल पर्ची या पैकर्स बिल) पास रखें।
- 2. रोके जाने पर कहें: "सर, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 47 के अनुसार 12 महीने तक गाड़ी चलाने की कानूनी छूट है। यह मेरी टोल रसीद है।\"
- 3. एमपरिवहन ऐप पर प्रदूषण, बीमा और आरसी सक्रिय रखें।
- 4. यदि 1 साल से ज्यादा रहना हो, तो मूल आरटीओ से एनओसी लेकर नए राज्य में रजिस्ट्रेशन कराएं।
जेब्रा क्रॉसिंग पर पैदल यात्रियों के अधिकार: क्या वाहन चालकों का रुकना अनिवार्य है?
हाँ! मोटर वाहन (ड्राइविंग) विनियम 2017 के नियम 11 के अनुसार, जेब्रा क्रॉसिंग पर पहला अधिकार पैदल चलने वालों का है। पैदल यात्री को रास्ता न देने वाले चालकों पर खतरनाक ड्राइविंग के तहत ₹1,000 तक चालान काटा जा सकता है।
- • 1. बिना ट्रैफिक लाइट वाली जेब्रा क्रॉसिंग पर गाड़ी की रफ्तार धीमी करना और पैदल यात्री को रास्ता देना अनिवार्य है।
- • 2. जेब्रा क्रॉसिंग पर रुकी हुई किसी अन्य गाड़ी को ओवरटेक करना कानूनन अपराध है।
- • 3. रेड लाइट पर गाड़ी को जेब्रा क्रॉसिंग के ऊपर खड़ा करना चालान का कारण बनता है।
- 1. पैदल यात्री: वाहन के रुकने पर ही सड़क पार करें, अचानक तेज दौड़कर सड़क पर न आएं।
- 2. चालक: लाल बत्ती पर हमेशा सफेद स्टॉप लाइन से पहले ही वाहन पूरी तरह रोकें।
- 3. जेब्रा क्रॉसिंग पर गाड़ी न रोकने वाले खतरनाक चालकों की तस्वीर खींचकर ट्रैफिक पुलिस ऐप पर शिकायत करें।
- 4. धारा 184 (खतरनाक ड्राइविंग) के तहत चालान करने की मांग करें।
एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड का रास्ता रोकना: सड़क पर क्या है कानूनी सजा और ₹10,000 जुर्माना?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194E के तहत, सायरन बजा रही एंबुलेंस या दमकल को रास्ता न देने पर ₹10,000 का भारी चालान और 6 महीने तक की जेल हो सकती है।
- • 1. एंबुलेंस का सायरन सुनते ही सभी चालकों को तुरंत बाईं ओर मुड़कर रास्ता खाली करना अनिवार्य है।
- • 2. ट्रैफिक सीसीटीवी कैमरे रास्ता रोकने वाले वाहनों का स्वतः ₹10,000 का ई-चालान जारी करते हैं।
- • 3. देरी के कारण मरीज की मृत्यु होने की गंभीर स्थिति में जीवन को खतरे में डालने की आपराधिक धाराएं लग सकती हैं।
- 1. पीछे से एंबुलेंस आने पर तुरंत बायां इंडिकेटर दें और बीच में साफ रास्ता छोड़ें।
- 2. ट्रैफिक से बचने के लिए कभी भी एंबुलेंस के ठीक पीछे तेज गति से न चलें।
- 3. यदि कोई वाहन जानबूझकर एंबुलेंस को रास्ता न दे, तो उसकी नंबर प्लेट का वीडियो बनाएं।
- 4. वीडियो को ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन पर भेजकर ₹10,000 का चालान कटवाएं।
गाड़ी पर पहिया क्लैंप (ताला) लगा दिया गया: अनलॉकिंग फीस देने से पहले आपके क्या कानूनी अधिकार हैं?
ट्रैफिक नियमों के अनुसार, पहिए पर क्लैंप लगाने पर पुलिस कोई मनमाना नकद शुल्क नहीं ले सकती। उन्हें फोटो सबूत के साथ आधिकारिक ई-चालान रसीद देनी होगी और तुरंत ताला खोलना होगा।
- • 1. प्राइवेट क्रेन या क्लैंपिंग ठेकेदार बिना पुलिस अधिकारी की मौजूदगी के कोई पैसा नहीं वसूल सकते।
- • 2. क्लैंप केवल वहीं लगाया जा सकता है जहां स्पष्ट रूप से "नो पार्किंग" का बोर्ड लगा हो।
- • 3. क्लैंपिंग चार्ज का सरकारी ई-चालान या एसएमएस रसीद मिलना अनिवार्य है, बिना रसीद नकद देना अवैध है।
- 1. गाड़ी के शीशे पर लगे क्लैंप स्टिकर से ट्रैफिक सर्किल अधिकारी का नंबर नोट करें।
- 2. उस जगह की फोटो लें कि क्या वहां वास्तव में नो पार्किंग बोर्ड लगा था या नहीं।
- 3. जुर्माना केवल पीओएस मशीन या echallan पोर्टल पर ही ऑनलाइन भरें।
- 4. यदि ठेकेदार बिना रसीद नकद मांगे, तो 112 पर कॉल करके भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज करें।
हाईवे पर कार खराब हो गई: क्या पुलिस तुरंत क्रेन बुलाकर गाड़ी खींच सकती है और भारी चालान कर सकती है?
नहीं! मोटर वाहन अधिनियम की धारा 127 के तहत, यदि वाहन में हैजार्ड लाइट जल रही है और रिफ्लेक्टर रखा है, तो चालक को मैकेनिक या अपनी टोइंग बुलाने का उचित समय दिया जाना अनिवार्य है।
- • 1. अचानक तकनीकी खराबी जानबूझकर किया गया पार्किंग उल्लंघन नहीं है यदि चालक ने चेतावनी लाइट जलाई हो।
- • 2. चालक को चार इंडिकेटर (हैजार्ड लाइट) चालू करने और गाड़ी से 50 मीटर पीछे रिफ्लेक्टर रखना चाहिए।
- • 3. पुलिस का कर्तव्य नागरिक को संकट में सहायता करना है, न कि जबरन गाड़ी खींचकर जुर्माना वसूलना।
- 1. हैजार्ड लाइट तुरंत चालू करें और गाड़ी के पीछे रिफ्लेक्टिव त्रिकोण रखें।
- 2. अपनी बीमा कंपनी की रोडसाइड असिस्टेंस (RSA) या 1033 पर कॉल करें।
- 3. पुलिस आने पर विनम्रता से कहें: "सर, गाड़ी खराब हो गई है। क्रेन 20 मिनट में आ रही है, मैंने चेतावनी लाइटें जलाई हुई हैं।\"
- 4. ट्रैफिक ज्यादा होने पर पुलिस की मदद से गाड़ी को सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान पर धकेलें।
थाने में 24 घंटे से अधिक समय तक बैठाए रखना: कब हिरासत अवैध कैद बन जाती है?
पूर्णतः गैरकानूनी! संविधान के अनुच्छेद 22(2) और बीएनएसएस की धारा 58 के तहत, पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर नजदीकी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है। 24 घंटे से अधिक थाने में रखना अवैध कैद है।
- • 1. 24 घंटे का समय उसी क्षण से शुरू हो जाता है जब व्यक्ति को पुलिस हिरासत में लेती है, औपचारिक गिरफ्तारी के समय से नहीं।
- • 2. मजिस्ट्रेट के न्यायिक आदेश के बिना 24 घंटे से अधिक थाने में बैठाना संविधान के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है।
- • 3. परिजन तुरंत उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर कर सकते हैं।
- 1. थाने की जनरल डायरी (GD) में आने का सही समय दर्ज करने की मांग करें।
- 2. परिजनों से कहें कि वे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को अवैध हिरासत की सूचना तुरंत ईमेल या स्पीड पोस्ट से भेजें।
- 3. वकील के माध्यम से उच्च न्यायालय में तत्काल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Article 226) दायर कराएं।
- 4. थाना प्रभारी के खिलाफ राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस द्वारा घर की तलाशी: क्या पुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं के निजी कमरों में बिना महिला पुलिस के घुस सकते हैं?
नहीं! बीएनएसएस की धारा 103 के तहत, महिलाओं के निवास वाले कमरे की तलाशी के समय उन्हें हटने का अवसर देना होगा और तलाशी केवल महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में शालीनता के साथ ही ली जा सकती है।
- • 1. पुरुष पुलिसकर्मी बिना महिला पुलिस के महिलाओं के शयनकक्ष या निजी स्थान में जबरन नहीं घुस सकते।
- • 2. अंदर जाने से पहले महिलाओं को पर्दा करने और कमरे से हटने का उचित समय देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- • 3. किसी भी महिला की शारीरिक तलाशी केवल और केवल महिला पुलिसकर्मी द्वारा ही ली जा सकती है।
- 1. बंद दरवाजे से पूछें: "अपना सर्च वारंट दिखाएं और बताएं कि क्या आपके साथ महिला पुलिसकर्मी हैं?\"
- 2. स्पष्ट कहें: "बीएनएसएस की धारा 103 के अनुसार महिला पुलिस के बिना आप महिलाओं के कमरे में नहीं आ सकते।\"
- 3. पड़ोस के दो सम्मानित नागरिकों को गवाह (पंच) के रूप में तुरंत बुलाएं।
- 4. जबरदस्ती घुसने पर 112 पर कॉल करें और मर्यादा हनन की आपराधिक शिकायत दर्ज कराएं।