क्या हर कंपनी में महिला सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) होना अनिवार्य है?
हाँ। 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में वरिष्ठ महिला की अध्यक्षता में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- • समिति में कम से कम 50% महिला सदस्य और एक बाहरी सामाजिक संस्था का सदस्य होना अनिवार्य है।
- घटना के 3 महीने के भीतर समिति को लिखित शिकायत दें। 90 दिनों में जांच पूरी होना अनिवार्य है।
क्या बालिग महिला बिना पति की अनुमति के 24 सप्ताह तक गर्भपात (Abortion) करा सकती है?
हाँ। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार प्रजनन का अधिकार केवल महिला का है; कानूनी सीमा (24 सप्ताह) में गर्भपात के लिए पति या ससुराल वालों की सहमति की आवश्यकता नहीं है।
- • यह अधिकार विवाहित और अविवाहित सभी महिलाओं को समान रूप से प्राप्त है।
- सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में डॉक्टर से परामर्श लें, केवल आपकी सहमति पर्याप्त है।
क्या मकान मालिक किराया विवाद में आपकी बिजली या पानी की सप्लाई काट सकता है?
बिल्कुल नहीं! बिजली और पानी जीवन की अनिवार्य जरूरतें हैं। इन्हें काटने वाले मकान मालिक के खिलाफ कोर्ट तत्काल बहाली का आदेश और हर्जाना लगाती है।
- • मॉडल टेनेंसी एक्ट के तहत मकान मालिक को जरूरी सेवाएं रोकने की सख्त मनाही है।
- मकान मालिक को सूचित करें और रेंट कंट्रोलर के पास आपातकालीन अर्जी लगाएं।
क्या मकान मालिक बिना पूर्व सूचना के आपकी मर्जी के बिना फ्लैट में घुस सकता है?
नहीं। किराये का मकान किरायेदार का निजी स्थान है। मकान मालिक को अंदर आने के लिए कम से कम 24 घंटे पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
- • निरीक्षण केवल सुबह 7 से रात 8 बजे के बीच पूर्व सूचना देकर ही किया जा सकता है।
- कहें: 'सर, नियम अनुसार आने से 24 घंटे पहले सूचित करें।'
क्या मकान मालिक सामान्य टूट-फूट के नाम पर पूरी सिक्योरिटी डिपॉजिट हड़प सकता है?
नहीं। सामान्य टूट-फूट या हल्के पेंट फीके पड़ने के नाम पर पूरी सिक्योरिटी काटना गैरकानूनी है। तय समय में रिफंड देना अनिवार्य है।
- • मकान खाली करने के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाना अनिवार्य है।
- चाबी सौंपते समय कमरे का वीडियो बनाएं और कटौती पर जीएसटी बिल की मांग करें।
क्या हाउसिंग सोसाइटी (RWA) कुंवारों (Bachelors) को फ्लैट देने पर रोक लगा सकती है?
नहीं। आरडब्ल्यूए (RWA) को मकान मालिक के किराये पर देने के अधिकार या किरायेदारों के आने-जाने पर मनमाना कर्फ्यू लगाने की कोई कानूनी शक्ति नहीं है।
- • सोसाइटी के नियम देश के संविधान और नागरिक अधिकारों के ऊपर नहीं हो सकते।
- सोसाइटी को बताएं कि मनमाने नियम असंवैधानिक हैं, और परेशान करने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
क्या कोई निजी अस्पताल अग्रिम पैसे न होने पर गंभीर मरीज का इलाज करने से मना कर सकता है?
सख्ती से मना है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हर अस्पताल का पहला कर्तव्य गंभीर मरीज की जान बचाना है; पैसे की कमी के कारण इलाज नहीं रोका जा सकता।
- • क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत आपातकालीन स्थिति में मरीज का प्राथमिक इलाज अनिवार्य है।
- अस्पताल को परमानंद कटारा फैसले की याद दिलाएं और तुरंत इलाज शुरू करने को कहें।
क्या बकाया बिल के नाम पर अस्पताल मृतक का शव (Dead Body) रोक सकता है?
पूरी तरह गैरकानूनी! किसी भी अस्पताल को बकाया बिल के नाम पर शव बंधक बनाने का कोई हक नहीं है। यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।
- • अस्पताल बिल वसूली के लिए अलग से कानूनी रास्ता अपना सकता है, लेकिन शव को नहीं रोक सकता।
- तुरंत 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचना दें कि अस्पताल शव बंधक बना रहा है।