क्या ट्रैफिक पुलिस डिजिलॉकर या mParivahan दस्तावेजों को मानने से मना कर सकती है?
नहीं! डिजिलॉकर या mParivahan पर उपलब्ध ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी कानूनी रूप से मूल दस्तावेजों के समान 100% मान्य हैं।
- • सड़क परिवहन मंत्रालय के आदेशानुसार डिजिलॉकर के दस्तावेज पूरी तरह वैध हैं।
- • पुलिस केवल फिजिकल कार्ड न होने के आधार पर चालान या जब्ती नहीं कर सकती।
- डिजिलॉकर ऐप खोलकर क्यूआर कोड और सत्यापित लाइसेंस दिखाएं।
- नियम 139 CMVR का हवाला दें।
यदि पुलिस आपको गिरफ्तार करने आए तो आपके पास क्या कानूनी अधिकार हैं?
गिरफ्तारी का कारण जानने, वकील करने, परिजन को सूचना देने और 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार।
- • डी.के. बसु दिशानिर्देश के अनुसार पुलिस को अरेस्ट मेमो बनाना होगा।
- • 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है।
- • धारा 54 के तहत मेडिकल जांच कराने की मांग कर सकते हैं।
- स्पष्ट पूछें कि किस धारा में गिरफ्तारी हो रही है और अरेस्ट मेमो मांगें।
- अपने परिजन या वकील को फोन करने की मांग करें।
क्या पुलिस मारपीट कर आपसे जबरन कुबूलनामा या सादे कागज पर दस्तखत करा सकती है?
नहीं! पुलिस के सामने दिया गया इकबालिया बयान अदालत में अमान्य है, और आपको चुप रहने का मौलिक अधिकार है।
- • अनुच्छेद 20(3) के अनुसार किसी भी अभियुक्त को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
- • पुलिस के सामने थर्ड डिग्री या मारपीट कर लिया गया बयान कोर्ट में सबूत नहीं माना जाता।
- शांत रहें और कहें कि बयान वकील की मौजूदगी में या मजिस्ट्रेट के सामने ही देंगे।
- कोरे कागज पर दस्तखत न करें और मारपीट की सूचना मजिस्ट्रेट को सीधे दें।
क्या कोई निजी अस्पताल एक्सीडेंट पीड़ित का इलाज करने से मना कर सकता है या पहले पुलिस रिपोर्ट मांग सकता है?
नहीं! हर अस्पताल को घायल या गंभीर मरीज को तुरंत आपातकालीन प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य है, पुलिस का इंतजार नहीं करना होता।
- • परमानंद कटारा फैसले के अनुसार जीवन रक्षा सर्वोच्च है। पुलिस कार्यवाही का इंतजार किए बिना तुरंत इलाज शुरू करना अनिवार्य है।
- • अस्पताल पैसे या कागजी कार्रवाई के बहाने गंभीर मरीज को मना नहीं कर सकता।
- अस्पताल को सुप्रीम कोर्ट के परमानंद कटारा फैसले की याद दिलाएं और तुरंत 112 पर सूचना दें।
क्या आप सार्वजनिक स्थान पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी या सरकारी अधिकारी का वीडियो बना सकते हैं?
हाँ! सार्वजनिक स्थान पर ड्यूटी कर रहे अधिकारी का वीडियो बनाना आपका संवैधानिक अधिकार है, बशर्ते आप उनके काम में बाधा न डालें।
- • हाई कोर्ट के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर ड्यूटी कर रहे अधिकारी की कोई निजी प्राइवेसी नहीं होती।
- • पुलिस केवल वीडियो बनाने के नाम पर फोन नहीं छीन सकती और न ही वीडियो डिलीट करवा सकती है।
- सुरक्षित दूरी पर रहकर वीडियो बनाएं ताकि कोई काम में बाधा का आरोप न लगा सके।
- फोन छीनने की कोशिश पर वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करें।
क्या नागरिकों के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और तख्तियां लेकर विरोध जताने का अधिकार है?
हाँ! बिना हथियारों के शांतिपूर्वक एकत्र होना और विरोध जताना अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत मौलिक अधिकार है।
- • लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार है।
- • बिना ठोस हिंसा की आशंका के धारा 144 लगाना असंवैधानिक है।
- शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराएं और मनमाने प्रतिबंधों को हाई कोर्ट में चुनौती दें।
क्या सादे कपड़ों (बिना वर्दी) में पुलिसकर्मी गाड़ी रोककर चालान काट सकते हैं?
नहीं। सड़क पर चेकिंग और चालान केवल वर्दीधारी पुलिसकर्मी ही कर सकते हैं जिनकी नेमप्लेट स्पष्ट दिख रही हो।
- • डी.के. बसु फैसले के तहत ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों का नेमप्लेट लगाना अनिवार्य है।
- कहें: 'सर, कृपया अपना आधिकारिक पुलिस पहचान पत्र दिखाइए। बिना वर्दी के मैं दस्तावेज नहीं दे सकता।'
क्या सड़क दुर्घटना में घायल की मदद करने पर पुलिस आपको परेशान कर सकती है?
बिल्कुल नहीं! गुड सेमेरिटन कानून के तहत घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को पुलिस पूछताछ और अस्पताल खर्च से पूरी छूट प्राप्त है।
- • अस्पताल मदद करने वाले व्यक्ति से पैसे या फॉर्म भरने की मांग नहीं कर सकता।
- घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं और डॉक्टरों को गुड सेमेरिटन कानून का हवाला दें।