क्या पुलिस बिना लिखित नोटिस के आपको थाने बुला सकती है?
नहीं। 7 साल से कम सजा वाले मामलों में पुलिस को धारा 41A (BNSS 35) के तहत औपचारिक लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
- • सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार फैसले के अनुसार फोन पर थाने बुलाना गैरकानूनी है।
- • लिखित नोटिस का पालन करने पर पुलिस बिना कोर्ट आदेश के गिरफ्तार नहीं कर सकती।
- कहें: 'सर, कृपया धारा 41A के तहत लिखित नोटिस भेजें, मैं अपने वकील के साथ उपस्थित हो जाऊंगा।'
क्या एफआईआर दर्ज कराने पर तुरंत मुफ्त कॉपी पाना आपका कानूनी अधिकार है?
हाँ। धारा 154(2) के तहत शिकायतकर्ता को एफआईआर की मुहर लगी प्रति तुरंत और बिल्कुल मुफ्त देना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।
- • पुलिस एफआईआर की कॉपी के लिए पैसे नहीं मांग सकती।
- • सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एफआईआर 24-48 घंटे में ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध होनी चाहिए।
- कहें: 'सर, धारा 154(2) के तहत कृपया मुझे एफआईआर की प्रमाणित मुफ्त कॉपी दीजिए।'
यदि थाना प्रभारी गंभीर अपराध पर भी एफआईआर दर्ज करने से मना कर दे तो क्या करें?
संगीन अपराध है। एफआईआर न लिखने वाले पुलिस अधिकारी को धारा 166A (BNS 199) के तहत 2 साल तक की जेल हो सकती है।
- • ललिता कुमारी केस में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया है।
- • थाना न सुने तो एसपी (SP) को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजें या कोर्ट में धारा 156(3) में अर्जी लगाएं।
- अपनी लिखित शिकायत की रिसीविंग लें और न मिलने पर एसपी को रजिस्टर्ड डाक से भेजें।
क्या गिरफ्तारी के समय अरेस्ट मेमो पर किसी परिजन या स्थानीय गवाह के हस्ताक्षर जरूरी हैं?
अनिवार्य है। धारा 41B के तहत अरेस्ट मेमो पर परिवार के कम से कम एक सदस्य या इलाके के प्रतिष्ठित व्यक्ति के हस्ताक्षर होना कानूनी रूप से जरूरी है।
- • अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी का सही समय, तारीख व स्थान लिखा होना चाहिए।
- कहें: 'सर, धारा 41B के तहत कृपया अरेस्ट मेमो बनाइए और गवाह के हस्ताक्षर करवाइए।'
क्या पुलिस हिरासत के दौरान हर 48 घंटे में डॉक्टर से मेडिकल जांच कराना अनिवार्य है?
हाँ, अनिवार्य है। धारा 54 के तहत गिरफ्तारी के समय और हिरासत के दौरान हर 48 घंटे में सरकारी डॉक्टर से मेडिकल जांच कराना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।
- • मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित होता है कि पुलिस ने हिरासत में मारपीट की है या नहीं।
- डॉक्टर को सभी चोटें दिखाएं और एमएलसी (MLC) में दर्ज करवाएं।
क्या हर कंपनी में महिला सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) होना अनिवार्य है?
हाँ। 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में वरिष्ठ महिला की अध्यक्षता में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- • समिति में कम से कम 50% महिला सदस्य और एक बाहरी सामाजिक संस्था का सदस्य होना अनिवार्य है।
- घटना के 3 महीने के भीतर समिति को लिखित शिकायत दें। 90 दिनों में जांच पूरी होना अनिवार्य है।
क्या बालिग महिला बिना पति की अनुमति के 24 सप्ताह तक गर्भपात (Abortion) करा सकती है?
हाँ। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार प्रजनन का अधिकार केवल महिला का है; कानूनी सीमा (24 सप्ताह) में गर्भपात के लिए पति या ससुराल वालों की सहमति की आवश्यकता नहीं है।
- • यह अधिकार विवाहित और अविवाहित सभी महिलाओं को समान रूप से प्राप्त है।
- सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में डॉक्टर से परामर्श लें, केवल आपकी सहमति पर्याप्त है।