भारतीय संविधान और विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत देश के प्रत्येक जिले में निःशुल्क वकील, कोर्ट फीस छूट और जमानत/मुकदमे की विधिक सहायता पाना आपका वैधानिक अधिकार है।
जिला कोर्ट, हाई कोर्ट या ट्रिब्यूनल में आपका केस लड़ने के लिए सरकार द्वारा अनुभवी वकील नियुक्त किया जाता है।
मुकदमे की कोर्ट फीस, प्रक्रिया शुल्क और ड्राफ्टिंग का सारा खर्च विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वहन किया जाता है।
पुलिस थाने या मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेशी के समय तुरंत जमानत याचिका दायर करने के लिए रिमांड ड्यूटी वकील उपलब्ध रहते हैं।
महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा से संरक्षण, भरण-पोषण (125), बच्चे की कस्टडी और वैवाहिक मामलों में निःशुल्क वकील।
ट्रैफिक चालान, बैंक लोन, बिजली बिल और संपत्ति विवादों का बिना किसी कोर्ट फीस के आपसी सहमति से अंतिम निपटारा।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC) के जरिए मुफ्त वरिष्ठ वकील।
नीचे दिए गए विकल्पों में से जो भी आप पर लागू होता है, उस पर टिक करें:
किसी भी जिला कोर्ट के "DLSA फ्रंट ऑफिस" में सीधे पहुंचे या घर बैठे 15100 पर 24 घंटे कॉल करें।
अपनी समस्या बताएं। यदि लिख नहीं सकते तो वहां मौजूद पैरा-लीगल स्वयंसेवक आपके लिए आवेदन लिखेंगे।
डीएलएसए सचिव (जो वरिष्ठ न्यायाधीश होते हैं) तुरंत आपके मामले के लिए पैनल वकील नियुक्त करेंगे।
वकील अदालत में आपका पक्ष रखेंगे। जीत या हार किसी भी दशा में आपसे पैसे मांगना कानूनी अपराध है।
जी हां, बिल्कुल मुफ्त। नियुक्त वकील को सरकार (DLSA) द्वारा सीधे पारिश्रमिक दिया जाता है। आपको कोई वकील फीस, कोर्ट फीस, टाइपिंग या कागजी खर्च नहीं देना होता।
तत्काल। प्रत्येक मजिस्ट्रेट कोर्ट में रिमांड एडवोकेट (ड्यूटी काउंसिल) तैनात रहते हैं जिन्हें गिरफ्तारी के समय तुरंत बुलाया जा सकता है। आप 24 घंटे 15100 हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं।
हाँ! विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 12(c) के तहत देश की प्रत्येक महिला (चाहे उसकी या उसके परिवार की आय कुछ भी हो) बिना किसी आय प्रमाण पत्र के मुफ्त वकील पाने की हकदार है।
डीएलएसए के पास अनुभवी वकीलों का एक पैनल होता है। यदि पैनल में आपकी पसंद का कोई वकील है, तो आप आवेदन में उनका नाम लिख सकते हैं, जिसे सचिव द्वारा सामान्यतः स्वीकार कर लिया जाता है।
पैसे मांगना गंभीर अपराध है। तुरंत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव या जिला जज से लिखित शिकायत करें। उस वकील को पैनल से हटाकर आपको तुरंत दूसरा वरिष्ठ वकील दिया जाएगा।