आपातकालीन नागरिक हेल्पलाइन

नागरिक विधिक सुरक्षा कवच • वास्तविक विधिक अधिकार

वास्तविक परिस्थितियों में आपके क्या कानूनी अधिकार हैं?

ट्रैफिक चेकिंग, फोन चेकिंग, गिरफ्तारी, महिला सुरक्षा, अस्पताल और उपभोक्ता विवाद — जानिए कानून क्या कहता है और शांत रहकर अपने अधिकार कैसे सुरक्षित रखें।

कार्यस्थल व नौकरी

⛔ Illegal / Prohibited
दिखाए जा रहे हैं 1–3 कुल 3 अधिकार
रीसेट
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Career Freedom ⛔ UNLAWFUL WITHHOLDING 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या कंपनी नोटिस पीरियड पूरा होने के बाद भी आपका रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र रोक सकती है?

नहीं। नोटिस पूरा होने पर अनुभव प्रमाण पत्र रोकना आजीविका के अधिकार (अनुच्छेद 21) और रोजगार की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है।

लागू कानून व प्रावधान: Article 19(1)(g) & Article 21 Constitution of India & State Shops and Establishments Acts
संबंधित अनुच्छेद: Article 19(1)(g) (Right to Practice Any Profession) & Article 21 (Livelihood) (अनुच्छेद 19 →) (अनुच्छेद 21 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 19, 21 कवच
“एचआर / प्रबंधन महोदय, Article 19(1)(g) & Article 21 Constitution of India & State Shops and Establishments Acts के अनुसार, हाईकोर्ट ने माना है कि अनुभव प्रमाण पत्र कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है। संविधान के Article 19(1)(g) (Right to Practice Any Profession) & Article 21 (Livelihood) के तहत यह मेरी मौलिक स्वतंत्रता है; यदि कोई रोक है तो कृपया सक्षम अधिकारी का लिखित आदेश दिखाएं।”
कानून क्या कहता है
  • • हाईकोर्ट ने माना है कि अनुभव प्रमाण पत्र कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. एचआर को लिखित ईमेल भेजें और न मिलने पर लेबर कमिश्नर या वकील के जरिए लीगल नोटिस भिजवाएं।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Career Right ⛔ VOID BY LAW 🌐 अखिल भारतीय कानून

क्या कंपनी नौकरी छोड़ने के बाद प्रतिद्वंद्वी कंपनी में काम करने पर 1-2 साल का प्रतिबंध लगा सकती है?

पूरी तरह अमान्य और शून्य! भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 27 के तहत किसी भी नागरिक को उसकी पसंद का रोजगार करने से रोकने वाला कोई भी बॉन्ड कानूनन शून्य (Void) होता है।

लागू कानून व प्रावधान: Section 27, Indian Contract Act, 1872 & Supreme Court Ruling in Percept D'Mark v. Zaheer Khan (2006)
संबंधित अनुच्छेद: Article 19(1)(g) (Freedom of Profession & Trade) (अनुच्छेद 19 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 19 कवच
“एचआर / प्रबंधन महोदय, Section 27, Indian Contract Act, 1872 & Supreme Court Ruling in Percept D'Mark v. Zaheer Khan (2006) के अनुसार, नौकरी समाप्त होने के बाद लगाया गया कोई भी नॉन-कम्पीट प्रतिबंध भारतीय अदालतों में टिक नहीं सकता। संविधान के Article 19(1)(g) (Freedom of Profession & Trade) के तहत यह मेरी मौलिक स्वतंत्रता है; यदि कोई रोक है तो कृपया सक्षम अधिकारी का लिखित आदेश दिखाएं।”
कानून क्या कहता है
  • • नौकरी समाप्त होने के बाद लगाया गया कोई भी नॉन-कम्पीट प्रतिबंध भारतीय अदालतों में टिक नहीं सकता।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. कंपनी के नॉन-कम्पीट बॉन्ड की धमकियों से न डरें। केवल कंपनी का गोपनीय डेटा या कोड साथ न ले जाएं।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
Labour Rights ⛔ NO 100% SALARY WITHHOLDING OR UNLAWFUL CUTS 🌐 अखिल भारतीय कानून

कंपनी द्वारा मनमाना वेतन काटना: क्या नियोक्ता बिना जांच के आपकी पूरी सैलरी रोक सकता है या जुर्माना काट सकता है?

पूर्णतः गैरकानूनी! मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936 के तहत, नियोक्ता केवल कानूनी कटौतियां (पीएफ, ईएसआई, टैक्स) ही कर सकता है। कुल कटौती 50% से अधिक नहीं हो सकती और बिना लिखित जांच के सैलरी काटना अवैध है।

लागू कानून व प्रावधान: Section 7 & 8 Payment of Wages Act, 1936 & Code on Wages, 2019
संबंधित अनुच्छेद: Article 21 (Right to Livelihood), Article 23 (Prohibition of Forced/Unpaid Labour) (अनुच्छेद 21 →) (अनुच्छेद 23 →)
अधिकारी से शांत एवं विनम्र भाषा में क्या बोलें:
🛡️ अनुच्छेद 21, 23 कवच
“वेतन भुगतान अधिनियम की धारा 7 के तहत अनधिकृत वेतन कटौती कानूनी अपराध है।\ (संविधान के Article 21 (Right to Livelihood), Article 23 (Prohibition of Forced/Unpaid Labour) के तहत सुरक्षित)।”
कानून क्या कहता है
  • • 1. किसी भी महीने में कुल कटौती कर्मचारी के अर्जित वेतन के 50% से अधिक नहीं हो सकती।
  • • 2. किसी गलती पर जुर्माना केवल कारण बताओ नोटिस और लिखित स्पष्टीकरण के बाद ही लगाया जा सकता है।
  • • 3. महीने की 7 से 10 तारीख के भीतर वेतन का बैंक खाते में जमा होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
मौके पर क्या कहें और क्या करें
  1. 1. एचआर को ईमेल भेजकर सैलरी स्लिप और वेतन काटने का कानूनी कारण मांगें।
  2. 2. लिखें: "वेतन भुगतान अधिनियम की धारा 7 के तहत अनधिकृत वेतन कटौती कानूनी अपराध है।\"
  3. 3. 15 दिनों में भुगतान न होने पर श्रम आयुक्त (Labour Officer) के समक्ष दावा प्रस्तुत करें।
  4. 4. धारा 15 के तहत काटी गई रकम के साथ 10 गुना तक हर्जाने की मांग करें।
AI से पूछें (आगे क्या करें)
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