संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 296 'राजगामी, व्यपगत या स्वामीहीन होने से प्रोद्भूत संपत्ति' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 297 'राज्यक्षेत्रीय सागर-खंड या महाद्वीपीय मग्नतट भूमि में स्थित मूल्यवान चीजों और अनन्य आर्थिक क्षेत्र के संपत्ति स्रोतों का संघ में निहित होना' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 298 'व्यापार करने आदि की सरकार की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 299 'सरकारी संविदाएं (Contracts)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
संविधान के भाग XII (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद) का अनुच्छेद 300 'वाद और कार्यवाहियां (Suits and Proceedings)' का प्रावधान करता है। यह बिना कानून के टैक्स न लगाने (265), भारत व राज्यों की संचित निधि एवं आकस्मिकता निधि (266-267), केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, वित्त आयोग (280), सरकारी संविदाओं, सरकार पर मुकदमा दायर करने के नागरिक अधिकार (300) और संपत्ति के संवैधानिक अधिकार (300A) को नियंत्रित करता है।
44वें संविधान संशोधन अधिनियम (1978) द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 19(1)(f) व 31) की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक मजबूत 'संवैधानिक अधिकार' बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 'विद्या देवी (2020)' और 'कोलकाता नगर निगम बनाम बिमल कुमार शाह (2024)' में स्पष्ट किया है कि संपत्ति का अधिकार एक अमूल्य मानवाधिकार (Human Right) भी है।
अनुच्छेद 300A में 'संपत्ति' का अर्थ केवल जमीन, मकान या दुकान ही नहीं है, बल्कि इसमें आपकी गाड़ी/बाइक, बैंक जमा राशि और कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी भी शामिल है (जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव केस, 2013)। नवंबर 2024 के ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोजर जस्टिस' पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के मात्र आरोपी होने पर बिना कानूनी प्रक्रिया और नोटिस के उसका घर गिराना अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 300A का घोर उल्लंघन है।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 301 'व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 302 'व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन अधिरोपित करने की संसद की शक्ति' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 303 'व्यापार और वाणिज्य के संबंध में संघ और राज्यों की विधायी शक्तियों पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 304 'राज्यों के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 305 'विद्यमान विधियों और राज्य के एकाधिकार का उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 307 'अनुच्छेद 301 से अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए प्राधिकारी की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 308 'निर्वचन (भाग 14 सेवाएं)' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 309 'संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 310 'संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की पदावधि' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
अनुच्छेद 311 ईमानदार सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, बाबुओं, रेलवे कर्मियों और पुलिसकर्मियों को राजनीतिक बदले की भावना से बचाता है ताकि वे निडर होकर कानून के अनुसार काम कर सकें। यह दो अटल सुरक्षाएं देता है:
1. अनुच्छेद 311(1): किसी भी सरकारी कर्मचारी को उस अधिकारी से नीचे के पद वाले अधिकारी द्वारा बर्खास्त या पद से नहीं हटाया जा सकता जिसने उसे नियुक्त किया था।
2. अनुच्छेद 311(2): किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना विधिवत जांच (Departmental Inquiry) के, जिसमें उसे स्पष्ट आरोप बताए गए हों और अपने बचाव में सुनवाई का पूरा मौका दिया गया हो, बर्खास्त (Dismiss), पदच्युत (Remove) या पदावनत (Demote) नहीं किया जाएगा।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 312 'अखिल भारतीय सेवाएं (All-India Services — IAS, IPS, IFS)' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 312A 'कुछ सेवाओं के अधिकारियों की सेवा की शर्तों में परिवर्तन करने या उन्हें प्रतिसंहृत करने की संसद की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 313 'संक्रमणकालीन उपबंध' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 315 'संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग (UPSC एवं राज्य PSC)' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 316 'लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 317 'लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 318 'आयोग के सदस्यों और कर्मचारिवृंद की सेवा की शर्तों के बारे में विनियम बनाने की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 319 'आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 321 'लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 322 'लोक सेवा आयोगों के व्यय' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं) का अनुच्छेद 323 'लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन' का प्रावधान करता है। यह सरकारी कर्मचारियों की भर्ती व सेवा शर्तों (309), बिना निष्पक्ष जांच के बर्खास्तगी से सुरक्षा (311), अखिल भारतीय सेवाओं (312), तथा संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों (UPSC/State PSC, अनुच्छेद 315-323) की स्वतंत्रता और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करता है।
42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए भाग XIV-A (अधिकरण) का अनुच्छेद 323A 'प्रशासनिक अधिकरण (Administrative Tribunals)' का उपबंध करता है। यह सरकारी कर्मचारियों के सेवा विवादों के त्वरित निपटारे के लिए प्रशासनिक अधिकरण (CAT - अनुच्छेद 323A) तथा कर, श्रम, भूमि सुधार व अन्य मामलों के लिए विशेष अधिकरण (अनुच्छेद 323B) स्थापित करने का अधिकार देता है।
42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए भाग XIV-A (अधिकरण) का अनुच्छेद 323B 'अन्य विषयों के लिए अधिकरण (Tribunals for other matters)' का उपबंध करता है। यह सरकारी कर्मचारियों के सेवा विवादों के त्वरित निपटारे के लिए प्रशासनिक अधिकरण (CAT - अनुच्छेद 323A) तथा कर, श्रम, भूमि सुधार व अन्य मामलों के लिए विशेष अधिकरण (अनुच्छेद 323B) स्थापित करने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 324 देश में निष्पक्ष चुनावों की रीढ़ है। यह चुनाव आयोग को सरकार से स्वतंत्र होकर चुनाव कराने की पूरी शक्ति देता है। सत्ताधारी दल चुनाव आयोग पर दबाव न बना सके, इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह संसद के महाभियोग के बिना नहीं हटाया जा सकता।