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🇮🇳 भारत का सर्वोच्च विधान • 26 जनवरी 1950 को लागू

भारत का संपूर्ण संविधान: डिजिटल नागरिक महाग्रंथ

विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधान के 395 अनुच्छेदों, 25 भागों और 12 अनुसूचियों का अध्ययन करें सरल नागरिक भाषा, संविधान सभा के ऐतिहासिक विमर्श और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के साथ।

395+
अनुच्छेद (Articles)
25
भाग (Thematic Parts)
12
अनुसूचियां (Schedules)
106
संशोधन (Amendments)
📜 उद्देशिका “हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए...”
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
Page 8 • सरल नागरिक भाषा में
अनुच्छेद 198
Part VI

धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 198 'धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 199
Part VI

राज्य विधान-मंडल में "धन विधेयक" की परिभाषा

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 199 'राज्य विधान-मंडल में "धन विधेयक" की परिभाषा' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 200
Part VI

विधेयकों पर अनुमति (राज्यपाल की स्वीकृति)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 200 'विधेयकों पर अनुमति (राज्यपाल की स्वीकृति)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 201
Part VI

विचार के लिए आरक्षित विधेयक (राष्ट्रपति के विचारार्थ)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 201 'विचार के लिए आरक्षित विधेयक (राष्ट्रपति के विचारार्थ)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 202
Part VI

वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य बजट)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 202 'वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य बजट)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 203
Part VI

विधान-मंडल में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 203 'विधान-मंडल में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 204
Part VI

विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 204 'विनियोग विधेयक (Appropriation Bills)' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 205
Part VI

अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 205 'अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 206
Part VI

लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 206 'लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 207
Part VI

वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 207 'वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 208
Part VI

प्रक्रिया के नियम

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 208 'प्रक्रिया के नियम' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 209
Part VI

राज्य के विधान-मंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 209 'राज्य के विधान-मंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 210
Part VI

विधान-मंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 210 'विधान-मंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 211
Part VI

विधान-मंडल में चर्चा पर निर्बंधन

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 211 'विधान-मंडल में चर्चा पर निर्बंधन' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 212
Part VI

न्यायालयों द्वारा विधान-मंडल की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना

संविधान के भाग VI के अध्याय III (राज्य का विधान-मंडल) का अनुच्छेद 212 'न्यायालयों द्वारा विधान-मंडल की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना' को नियंत्रित करता है। यह राज्य विधानसभा व विधान परिषद के गठन, विधायकों (MLA/MLC) की योग्यता व अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों, राज्य के बजट और विधेयकों को पारित करने तथा उन पर अनुमति (अनुच्छेद 200-201) के नियम तय करता है।

अनुच्छेद 213
Part VI

विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति

संविधान के Part VI में स्थित अनुच्छेद 213 'विधान-मंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति' के संबंध में स्पष्ट संवैधानिक नियम और प्रक्रियात्मक सीमाएं निर्धारित करता है।

अनुच्छेद 214
Part VI

राज्यों के लिए उच्च न्यायालय (High Courts)

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 214 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'राज्यों के लिए उच्च न्यायालय (High Courts)' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 215
Part VI

उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 215 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 216
Part VI

उच्च न्यायालयों का गठन

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 216 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों का गठन' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 217
Part VI

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 217 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 218
Part VI

उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 218 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 219
Part VI

उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 219 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 220
Part VI

स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 220 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि-व्यवसाय (वकालत) पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 221
Part VI

न्यायाधीशों के वेतन आदि

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 221 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'न्यायाधीशों के वेतन आदि' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 222
Part VI

किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण (तबादला)

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 222 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण (तबादला)' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 223
Part VI

कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 223 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 224
Part VI

अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 224 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 224A
Part VI

उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 224A राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 225
Part VI

विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता

संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 225 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 226
Part VI

कुछ रिट निकालने की उच्च न्यायालय की शक्ति (मौलिक एवं विधिक अधिकारों की रक्षा)

अनुच्छेद 226 आम भारतीय नागरिक के दैनिक जीवन में सबसे अधिक काम आने वाला संवैधानिक हथियार है, क्योंकि इसके लिए आपको दिल्ली (सुप्रीम कोर्ट) जाने की जरूरत नहीं है—आप अपने ही राज्य के हाईकोर्ट में तुरंत याचिका दायर कर सकते हैं। इसके तहत हाईकोर्ट अपने राज्य के भीतर किसी भी पुलिस अधिकारी, कलेक्टर, नगर निगम, बिजली बोर्ड या सरकारी विभाग के विरुद्ध 5 रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा) या निर्देश जारी कर सकता है। सबसे रोचक तथ्य यह है कि कानूनी दायरे के मामले में अनुच्छेद 226 की शक्ति अनुच्छेद 32 से भी अधिक व्यापक है: जहां सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 के तहत केवल 'मौलिक अधिकारों' के उल्लंघन पर ही रिट जारी करता है, वहीं हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के साथ-साथ 'किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए' (For any other purpose)—जैसे संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 300A), अवैध बुलडोजर कार्रवाई, नौकरी/पेंशन विवाद, गलत टैक्स नोटिस या फर्जी FIR—पर भी तुरंत रिट और स्टे ऑर्डर दे सकता है।

सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) एवं वैधानिक प्रामाणिकता सूचना

भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम (Copyright Act), 1957 की धारा 52(1)(q) के अंतर्गत भारत का संविधान, संसदीय अधिनियम, राजपत्र अधिसूचनाएं तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में हैं। यह पाठ विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार (India Code) के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है।

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