संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 5 'संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 6 'पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 7 'पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 8 'भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्भव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 9 'विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
अनुच्छेद 10 भारतीय नागरिकों को स्थायी संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। यह स्पष्ट करता है कि भारत का नागरिक निरंतर नागरिक बना रहेगा। कोई भी पुलिस अफसर या सरकारी अधिकारी किसी नागरिक को मनमाने ढंग से "गैर-नागरिक" घोषित नहीं कर सकता या उसके अधिकार नहीं छीन सकता।
संविधान के भाग II (नागरिकता) का अनुच्छेद 11 'संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा विनियमन किया जाना' को स्पष्ट करता है। यह 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अधिवास (Domicile), विभाजन के दौरान प्रव्रजन (Migration), विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता की स्थिति तय करता है।
सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) एवं वैधानिक प्रामाणिकता सूचना
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