विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधान के 395 अनुच्छेदों, 25 भागों और 12 अनुसूचियों का अध्ययन करें सरल नागरिक भाषा, संविधान सभा के ऐतिहासिक विमर्श और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के साथ।
395+
अनुच्छेद (Articles)
25
भाग (Thematic Parts)
12
अनुसूचियां (Schedules)
106
संशोधन (Amendments)
📜 उद्देशिका
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए...”
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 301 'व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 302 'व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन अधिरोपित करने की संसद की शक्ति' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 303 'व्यापार और वाणिज्य के संबंध में संघ और राज्यों की विधायी शक्तियों पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 304 'राज्यों के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 305 'विद्यमान विधियों और राज्य के एकाधिकार का उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
संविधान के भाग XIII (अनुच्छेद 301-307) का अनुच्छेद 307 'अनुच्छेद 301 से अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए प्राधिकारी की नियुक्ति' का उपबंध करता है। यह पूरे देश को एक एकीकृत आर्थिक बाजार बनाता है ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार और माल के परिवहन पर कोई राज्य भेदभावपूर्ण रुकावट न लगा सके, सिवाय जनहित में लगाए गए वैध नियमों के।
सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) एवं वैधानिक प्रामाणिकता सूचना
भारतीय प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम (Copyright Act), 1957 की धारा 52(1)(q) के अंतर्गत भारत का संविधान, संसदीय अधिनियम, राजपत्र अधिसूचनाएं तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्णय सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में हैं। यह पाठ विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार (India Code) के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है।
Architectural Blueprint
भारतीय संविधान के 5 मूल स्तंभ
भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है। सभी 395 अनुच्छेदों और 25 भागों को शासन एवं नागरिक सुरक्षा के इन 5 स्तंभों में समझा जा सकता है।
स्तंभ 1 • पहचान व राज्यक्षेत्र
संप्रभु गणराज्य, भूभाग व नागरिकता
भारत की संप्रभुता, राज्यों की सीमाओं तथा नागरिकता की कानूनी पहचान तय करता है।