अनुच्छेद 324 देश में निष्पक्ष चुनावों की रीढ़ है। यह चुनाव आयोग को सरकार से स्वतंत्र होकर चुनाव कराने की पूरी शक्ति देता है। सत्ताधारी दल चुनाव आयोग पर दबाव न बना सके, इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह संसद के महाभियोग के बिना नहीं हटाया जा सकता।
संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 325 'धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
जब 1950 में भारतीय संविधान लागू हुआ, तो अनुच्छेद 326 ने मानव इतिहास का सबसे साहसी लोकतांत्रिक प्रयोग किया: जहां पश्चिमी देशों को महिलाओं और गरीबों को वोट का अधिकार देने में सदियां लग गईं, वहीं भारत ने पहले ही दिन से हर वयस्क नागरिक—चाहे वह पुरुष हो या महिला, उद्योगपति हो या दिहाड़ी मजदूर, पढ़ा-लिखा हो या निरक्षर—को बराबर का मताधिकार दिया।
मूल रूप से मतदान की आयु 21 वर्ष थी, जिसे 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। अनुच्छेद 325 (जो धर्म, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची से बाहर करने पर रोक लगाता है) के साथ मिलकर अनुच्छेद 326 डॉ. आंबेडकर के 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत को जीवंत करता है।
संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 327 'विधान-मंडलों के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 328 'किसी राज्य के विधान-मंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध करने की उस विधान-मंडल की शक्ति' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
संविधान के भाग XV (निर्वाचन) का अनुच्छेद 329 'निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन' का प्रावधान करता है। यह स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (324), धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में किसी भी भेदभाव पर रोक (325), 18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार (326), चुनाव कानून बनाने की शक्ति (327-328) और निर्वाचन याचिकाओं की प्रक्रिया (329) को सुनिश्चित करता है।
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