उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना
त्वरित सारांश (TL;DR)
अनुच्छेद 218 (उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना): भाग VI के तहत राज्यों के उच्च न्यायालय (High Courts) के गठन, स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारिता का प्रावधान।
सरल नागरिक भाषा में अर्थ
संविधान के भाग VI के अध्याय V का अनुच्छेद 218 राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में 'उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना' का उपबंध करता है। यह हाई कोर्ट के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व पद-सुरक्षा, अभिलेख न्यायालय की शक्ति (215), रिट अधिकारिता (226) और राज्य की सभी निचली अदालतों के अधीक्षण (227) को सुनिश्चित करता है।
प्रमुख संवैधानिक उपबंध एवं बिंदु
संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 218): Part VI के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों को लागू होना' के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम तय करता है
इसमें 2 खंड (Clauses) के माध्यम से स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी द्वारा संरक्षित
अपवाद एवं युक्तियुक्त निर्बंधन (सीमाएं)
एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997) के अनुसार हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान के अनुल्लंघनीय मूल ढांचे का हिस्सा है।
दैनिक जीवन में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह प्रत्येक नागरिक को अपने ही राज्य में पुलिस या प्रशासन की किसी भी गैर-कानूनी कार्रवाई के खिलाफ तुरंत न्याय पाने का मजबूत मंच देता है।
और गहराई से पढ़ना चाहते हैं? आधिकारिक राजपत्रित मूल पाठ या सुप्रीम कोर्ट निर्णय व संविधान सभा बहस देखें: